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एक मनुष्य ईश्वर के समक्ष कैसे सही हो सकता है?

एक मनुष्य ईश्वर के समक्ष कैसे सही हो सकता है?

पहली नज़र में यह प्रश्न बहुतों को ऊट पटांग लगेगा | आख़िरकार, क्या परमेश्वर प्रत्येक को क्षमा नहीं करता और ग्रहण नहीं करता? क्या प्रत्येक परमेश्वर के समक्ष "सही" नहीं है?

यीशु मसीह में परमेश्वर का प्रेम

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यीशु मसीह में परमेश्वर का प्रेम

परमेश्वर का क्रोध अवर्णनीय है, लेकिन यीशु मसीह के द्वारा प्रदर्शित उनका प्रेम और भी वर्णन से बहार है |

सुसमाचार की प्राथमिकता

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सच्चे मसीही का बदला हुआ नया स्वभाव – भाग २

54:50

सच्चे मसीही का बदला हुआ नया स्वभाव – सत्र १ और २

1:14:03

मसीह के पुनरुत्थान का अर्थ – भाग २

58:23

पुनरुत्थान का अर्थ

1:19:23

मसीह का क्रूश

54:30

सभी पिता परमेश्वर की महिमा से दूर हो गए हैं

1:03:34

सब ने पाप किया है

1:14:55